देहरादून में एनडीएमए का दौरा: आपदा प्रबंधन को ‘बिल्ड बैक बेटर’ के तहत किया जाएगा और मजबूत

देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख और सदस्य राजेंद्र सिंह ने हाल ही में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण  का दौरा किया, जहां उन्होंने मानसून के कारण हुए नुकसान की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने आपदा राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एनडीएमए उत्तराखंड को ‘बिल्ड बैक बेटर’ की थीम पर एक आपदा-सुरक्षित राज्य बनाने के लिए हर संभव मदद करेगा।
आपदा के बाद आकलन और पुनर्निर्माण पर जोर
बैठक के दौरान, सिंह ने आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन (पीडीएनए) करने पर जोर दिया, जिसके लिए जल्द ही एक टीम राज्य का दौरा करेगी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आकलन से ही क्षति, प्रभावित लोगों और बुनियादी ढांचे का सही मूल्यांकन हो पाएगा, जिससे केंद्र सरकार अतिरिक्त आर्थिक सहायता दे सकेगी। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन को राहत और बचाव कार्यों के अनुभवों को दस्तावेजीकरण करने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य की नीतियों और तकनीकी सुधारों के लिए एक उपयोगी मॉडल तैयार हो सके।
विनोद कुमार सुमन ने बताया कि आपदा ने लोगों की आजीविका पर भी गहरा असर डाला है, जिसके लिए उन्हें एनडीएमए से व्यापक सहयोग की उम्मीद है।
मानवीय दृष्टिकोण और तत्परता की सराहना
सिंह ने 24 से 72 घंटों के भीतर प्रभावित लोगों को राहत राशि पहुंचाने के लिए राज्य प्रशासन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन का मानवीय पक्ष यह है कि प्रशासन हमेशा पीड़ितों के साथ खड़ा रहे, क्योंकि ऐसे समय में उन्होंने अपना सब कुछ खो दिया होता है।

मैपिंग और जोखिम मूल्यांकन आवश्यक

जोशीमठ में चल रहे कार्यों की जानकारी लेते हुए सिंह ने पर्वतीय राज्य में भूस्खलन और अतिवृष्टि जैसी चुनौतियों पर बात की। उन्होंने नदी किनारे बसे कस्बों की मैपिंग करने और जोखिम मूल्यांकन (रिस्क असेसमेंट) करने का सुझाव दिया, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय पर सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि आपदाओं के कारण लोगों का पलायन न हो, इसके लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाई जानी चाहिए, जो न केवल आजीविका, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

शोध संस्थानों के साथ समन्वय और सुरक्षित पर्यटन

सिंह ने राज्य के वैज्ञानिक संस्थानों के साथ समन्वय पर जोर दिया ताकि आपदा से पहले की तैयारियों को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर्यटन है, इसलिए सुरक्षित पर्यटन और चारधाम यात्रा को आपदा जोखिम से मुक्त बनाना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।