पिथौरागढ़ /तवाघाट। शारदीय नवरात्र के पावन पर्व की पंचमी तिथि पर, काली गंगा व धौलीगंगा के पवित्र संगम तट पर स्थित हिमालयन शिव शक्ति पीठ तवाघाट में एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। उत्तराखंड, तमिलनाडु और कर्नाटक के विद्वान आचार्यों ने विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चन कर गणेश जी, पार्वती जी, कार्तिकेय, नंदी और 108 शिवलिंगों का भव्य अष्टबंधन किया। यह अष्टबंधन शिवलिंगों को मजबूत आधार प्रदान करने की एक प्राचीन विधि है।
जूना अखाड़े के संरक्षण में कार्य सफल
डाॅ. स्वामी वीरेंद्रानन्द महामंडलेश्वर, पंचदश नाम जूना अखाड़ा ने बताया कि यह महत्वपूर्ण कार्य श्री श्री 1008 श्री महंत हरि गिरि महाराज जी, संरक्षक अखाड़ा परिषद महामंत्री जूना अखाड़े, के कुशल मार्गदर्शन और प्रेरणा से हिमालय के इस दुर्गम क्षेत्र में संभव हो पाया है।
आपदा निवारण केंद्र के साथ बनेगा बड़ा धाम
स्वामी वीरेंद्रानन्द ने आगे बताया कि भविष्य में यह आश्रम आध्यात्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा। यह पंचाचूली, छिपलाकेदार, नारायण आश्रम, आदि कैलाश, ओम् पर्वत व कैलाश मानसरोवर के मार्ग पर एक बड़े धाम के रूप में प्रसिद्ध होगा।
धार्मिक महत्ता के साथ ही, उचित संस्थानों के प्रबंधन के साथ यह आश्रम इस सीमांत क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आपदा निवारण केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा, जो स्थानीय लोगों और यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है।
शिवलिंगों के इस विशेष अष्टबंधन कार्यक्रम को विद्वान शास्त्री आचार्य श्री गिरीश तिवारी जी की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

