पिथौरागढ़। जनपद में वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आशीष भटगांई की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न प्रस्तावक विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

बैठक में बताया गया कि वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए वन विभाग द्वारा रिजर्व फॉरेस्ट एवं वन पंचायतों के अंतर्गत उपलब्ध खाली व डीग्रेडेड भूमि का योजनाबद्ध ढंग से चिन्हीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए समय पर उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराना है। विभागीय जानकारी के अनुसार वन पंचायतों के अंतर्गत 290 हेक्टेयर तथा रिज़र्व फॉरेस्ट के अंतर्गत 300 हेक्टेयर भूमि को क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु उपयुक्त रूप में चिन्हित किया गया है। यह भूमि भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं तकनीकी दृष्टि से अनुकूल पाई गई है।
जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि चिन्हित स्थलों से जुड़े सभी अभिलेखीय व प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण की जाएं। साथ ही प्रस्तावक विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर निर्धारित समयसीमा में क्षतिपूरक वृक्षारोपण एवं वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।
डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि क्षतिपूरक वृक्षारोपण को केवल औपचारिकता न मानते हुए दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण की रणनीति के रूप में लागू किया जा रहा है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रजातियों का वैज्ञानिक पद्धति से चयन कर वृक्षारोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीग्रेडेड वन क्षेत्रों के पुनर्जीवन से जैव विविधता, मृदा संरक्षण और जल स्रोतों को मजबूती मिलेगी।
बैठक में उपजिलाधिकारी सदर मनजीत सिंह, अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग, तहसीलदार विजय गोस्वामी, सहायक अभियंता लोनिवि उपस्थित रहे।
