एलएसएम परिसर में ‘आईपीआर विमर्श’ का आयोजन, भारतीय ज्ञान प्रणाली पर हुआ मंथन

पिथौरागढ़। एलएसएम परिसर, पिथौरागढ़ में “आईपीआर विमर्श” व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत “भारतीय ज्ञान प्रणाली: प्राचीन ज्ञान, भावी शिक्षा एवं बौद्धिक संपदा अधिकार” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एलएसएम परिसर द्वारा किया गया, जबकि इसे उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) का प्रायोजन प्राप्त था।

मुख्य वक्ता के रूप में डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के भौतिकी एवं जैव-भौतिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. आशीष रतूड़ी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक समृद्धि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्राचीन ग्रंथ सूर्य सिद्धांत में वर्णित खगोलीय सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत में खगोल विज्ञान की परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है।

उन्होंने लगभग 800 ईसा पूर्व के गणितज्ञ बौधायन के शुल्बसूत्र में वर्णित ज्यामितीय सिद्धांतों की चर्चा करते हुए कहा कि इन्हीं सिद्धांतों को बाद में पाइथागोरस के प्रमेय के रूप में विश्वभर में प्रसिद्धि मिली। साथ ही महान खगोलशास्त्री आर्यभट द्वारा पृथ्वी के घूर्णन एवं सटीक खगोलीय गणनाओं के उल्लेख को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर के निदेशक डॉ. हेम चन्द्र पांडे ने की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना समय की मांग है। साथ ही पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन में बौद्धिक संपदा अधिकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर 100 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में आईपीआर सेल की समन्वयक डॉ. गरिमा पुनैठा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता, निदेशक एवं उपस्थित सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।