पिथौरागढ़। उत्तराखण्ड आंगनवाडी कर्मचारी यूनियन (संबद्धः ऐक्टू) ने अपनी प्रमुख समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग को लेकर आंगनबाड़ी की प्रदेश अध्यक्ष दीपा पाण्डेय ने आज मुख्यमंत्री को संबोधित एक कड़ा ज्ञापन जिलाधिकारी, पिथौरागढ़, के माध्यम से सौंपा है।
पिथौरागढ़ जिलाधिकारी कार्यालय के निकट अधिसूचित धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन के बाद यूनियन ने सरकार पर कार्य का अनावश्यक बोझ थोपने, न्यूनतम मानदेय देने और शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की 7 मुख्य माँगें:
यूनियन ने बैठक में लिए गए सात अहम निर्णयों को सरकार के समक्ष रखा है:
अनावश्यक कार्य का बहिष्कार: विवाह पंजीकरण डाटा जैसे गैर-जरूरी काम थोपे जाने पर तत्काल कार्य बहिष्कार की चेतावनी।
काम का बोझ और पारिश्रमिक: न्यूनतम मानदेय में केवल केंद्र संचालन ही संभव है। सरकार द्वारा बिना पारिश्रमिक के थोपे गए अतिरिक्त कार्यों को करना अब संभव नहीं है।
मानदेय वृद्धि और राज्य कर्मचारी का दर्जा: सरकार पर मानदेय वृद्धि और राज्य कर्मचारी बनाए जाने की मांग पर गंभीर न होने का आरोप।
डाटा संग्रहण से केंद्र संचालन प्रभावित: जब भी कोई डाटा एकत्रित करने का काम दिया जाता है, इससे केंद्र संचालन प्रभावित होता है और कार्यकर्ता/सहायिका को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ती है।
गैर-विभागीय कार्य और सुरक्षा: विभाग से अलग किसी भी कार्य के लिए पारिश्रमिक नहीं मिलता। यूनियन ने सवाल उठाया है कि ऐसे कार्य करते हुए दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी विभाग/सरकार की होगी या नहीं?
आपदा कार्यों में जबरन ड्यूटी और अभद्रता: गंगोलीहाट में जबरन आपदा कार्यों में ड्यूटी लगाए जाने की निंदा की गई, जिससे केंद्र का काम बाधित हो रहा है। ड्यूटी के दौरान विभाग के कर्मचारी द्वारा अभद्रता की कड़ी निंदा करते हुए उस कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग की गई है।
शोषण और अमानवीय व्यवहार पर रोष (गंगोलीहाट): आंगनवाड़ी कार्यकर्ती दीपा पन्त को अपने दिवंगत पति के श्राद्ध के लिए नियमानुसार अवकाश लेने के बावजूद विभाग द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने को अमानवीय बताया गया है। स्पष्टीकरण वापस न लिए जाने पर गंगोलीहाट में समस्त कार्यकत्रीयों द्वारा आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी गई है।
सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम
यूनियन ने सरकार और संबंधित विभागों को अपनी मांगों पर सकारात्मक परिणाम देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि इस अवधि में उनकी माँगें पूरी नहीं होती हैं, तो प्रदेश स्तर पर व्यापक धरना प्रदर्शन और आमरण अनशन किया जाएगा, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
आंदोलन में नीमा खत्री, हेमा सेठी, जानकी, मधुमिता, रेखा महर, रीता सिंह, सरस्वती, दीपा पंत, पूजा खोलिया, मनीषा, रेनू तिवारी, बिशना बोरा, इंद्रा रफाल, ललिता सामंत, ममता देवी, रेखा चंद सहित कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ती शामिल रही।
