बेरीनाग। नगर पालिका परिषद बेरीनाग की बोर्ड बैठक पर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए विवादों की भेंट चढ़ गई। बैठक के दौरान हालात उस समय विस्फोटक हो गए, जब कई निर्वाचित सभासदों ने नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) पर गंभीर आरोप लगाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।

सभासद नंदी कार्की, नीमा देवी, भवानी प्रसाद टम्टा और किरन सिंह ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में लोकतंत्र केवल कागजों तक सीमित रह गया है और वास्तविक सत्ता कुछ चुनिंदा हाथों में सिमट कर रह गई है। सभासदों का कहना है कि उनके अधिकारों का लगातार हनन किया जा रहा है और उन्हें जानबूझकर निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।
सभासदों ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा जनहित में रखे गए प्रस्तावों को न तो गंभीरता से लिया जाता है और न ही बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाता है, जबकि नगर पालिका अध्यक्ष के प्रस्तावों को बिना चर्चा के पारित कराने का प्रयास किया जाता है। इससे साफ है कि बोर्ड बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
प्रस्ताव रजिस्टर में हस्ताक्षर तक नहीं! नियमों की खुलेआम अनदेखी
आरोप यह भी है कि बोर्ड बैठक के प्रस्ताव रजिस्टर में सभासदों के हस्ताक्षर नहीं कराए जाते, जो न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सभासदों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं बताया जाता कि पालिका में कौन से निर्णय लिए जा रहे हैं और किन कार्यों पर धन खर्च हो रहा है।
बोर्ड की मंजूरी बिना ठेका नवीनीकरण, नियुक्तियों पर भी सवाल
सभासदों ने नगर पालिका अध्यक्ष और ईओ पर बिना बोर्ड के चर्चा के स्वच्छता ठेकेदार का नवीनीकरण करने और कर्मचारियों की नियुक्तियां करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक मनमानी का स्पष्ट उदाहरण भी है।
सभासदों ने दो टूक कहा कि जनता ने उन्हें जनसेवा के लिए चुना है, लेकिन नगर पालिका की कार्यप्रणाली ने उन्हें केवल नाम मात्र का सभासद बनाकर रख दिया है। इस रवैये से वे स्वयं को अपमानित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सभासदों के बहिष्कार और गंभीर आरोपों के बाद नगर पालिका परिषद की कार्यशैली पर सवालों की बौछार हो गई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस मामले का संज्ञान लिया जाता है या फिर जनप्रतिनिधियों की आवाज एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी।
