देहरादून। एसटीएफ व साइबर क्राइम उत्तराखंड ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले राष्ट्रीय स्तर के साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराता था और खातों में धनराशि ट्रांसफर करवा लेता था। इस मामले में मुख्य अभियुक्त सोनू ऑगस्ट्री को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन और साइबर एसटीएफ के पुलिस महानिरीक्षक निलेश आनंद भरणे के पर्यवेक्षण में की गई इस कार्रवाई में एसटीएफ ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह ने बताया कि 18 दिसंबर को देहरादून निवासी मुकेश पांडे से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 40 लाख रुपये की ठगी की गई थी। इस संबंध में साइबर पुलिस थाना देहरादून में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम एक निजी बैंक के खाते में ट्रांसफर कराई गई थी, जिसका संचालन अभियुक्त सोनू ऑगस्ट्री कर रहा था। तकनीकी जांच, बैंक विवरण, कॉल विवरण और ग्राहक आवेदन प्रपत्रों के आधार पर पुलिस टीम 12 जनवरी को बेंगलुरु पहुंची और स्थानीय पुलिस की सहायता से अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि अभियुक्त के खातों से जुड़े चार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामले देशभर में दर्ज हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर उसके खिलाफ 200 से अधिक शिकायतें पाई गईं। अभियुक्त के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, फर्जी कंपनियों की मोहरें और डिजिटल भुगतान उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने अभियुक्त को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है। साइबर ठगी के इस बड़े नेटवर्क में अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।
