डीडीहाट में बाल सुरक्षा पर जागरूकता गोष्ठी, गुड टच-बैड टच और साइबर अपराधों से बचाव की दी जानकारी

डीडीहाट। अभिलाषा एकेडमी में नाबालिग बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता और नैतिक सुदृढ़ता को लेकर जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों के साथ होने वाले अपराध, गुड टच-बैड टच, बाल अपहरण, साइबर अपराध, मोबाइल के सुरक्षित उपयोग, नैतिक मूल्यों की आवश्यकता तथा 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

सिविल जज (जूनियर डिवीजन) न्यायमूर्ति गुलिस्तां अंजुम ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज, परिवार और विद्यालयों का भी साझा दायित्व है। उन्होंने बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देते हुए किसी भी प्रकार के शोषण की स्थिति में निर्भीक होकर सामने आने का आह्वान किया। उन्होंने गुड टच और बैड टच की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाते हुए आत्मसम्मान और आत्मरक्षा की भावना विकसित करने पर जोर दिया।

वरिष्ठ अधिवक्ता रघुनाथ सिंह चौहान ने बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी देते हुए कहा कि जागरूकता अपराध रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि बच्चे, अभिभावक और शिक्षक कानून की बुनियादी जानकारी रखें तो कई अपराध शुरुआती स्तर पर ही रोके जा सकते हैं।

सब इंस्पेक्टर प्रियंका मौनी ने साइबर अपराधों और मोबाइल के सही उपयोग पर प्रकाश डालते हुए इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर सतर्कता और अनजान लोगों से संवाद के खतरों के बारे में बताया। उन्होंने किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी।

कांस्टेबल तनीषा सामंत ने बाल अपहरण से बचाव के उपायों पर जानकारी देते हुए बच्चों को सतर्क रहने और व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सीख दी। पीएलबी खीमा देवी ने 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन को बच्चों के लिए सुरक्षा कवच बताते हुए इसके उपयोग की जानकारी दी।

अधिवक्ता अरविंद सिंह चौहान एवं तिर्लोक जंगपांगी ने नैतिक शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि सत्य, अनुशासन, करुणा और जिम्मेदारी जैसे मूल्य बच्चों के चरित्र निर्माण की आधारशिला हैं।

प्रधानाचार्या डॉ. अनीता जोशी ने अतिथियों का आभार जताया। विद्यालय प्रबंधक चंचल सिंह नितवाल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं।