पिथौरागढ़ में “मेरी चेली म्यार घरै पछयांण” अभियान की शुरुआत, बेटियों के नाम से सजे घर

पिथौरागढ़। बेटियों के सम्मान और बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने की दिशा में जनपद में एक अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष कुमार भटगाई के निर्देशानुसार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत “मेरी चेली म्यार घरै पछयांण” कार्यक्रम का शुभारंभ विकासखण्ड कनालीछीना के ग्राम सतगढ़ से किया गया।

जनपद में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का लिंगानुपात अपेक्षाकृत कम है। विशेष रूप से बालकों की तुलना में बालिकाओं का लिंगानुपात चिंताजनक स्थिति दर्शाता है। इसी पृष्ठभूमि में यह कार्यक्रम बालिका जन्म को बढ़ावा देने, कन्या भ्रूण हत्या की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने तथा लैंगिक समानता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कार्यक्रम के अंतर्गत बालिका के जन्म पर संबंधित परिवार के घर की पहचान बालिका के नाम से की जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग, पिथौरागढ़ द्वारा बालिकाओं के नाम की पट्टिकाएं परिवारों को उपलब्ध कराई गईं, जिन्हें घर के बाहर स्थापित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी स्वयं बालिका हर्षिता के घर पहुंचे और घर के बाहर उसके नाम की पट्टिका लगवाई। इसके अतिरिक्त खुशी, ईशा, अर्पिता, सपना, सौम्या सहित कुल 20 बालिकाओं को उनके नाम की पट्टिकाएं वितरित की गईं।

जिलाधिकारी ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से आमजन को बालिकाओं के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज को यह संदेश देना आवश्यक है कि बेटी किसी से कम नहीं है। अभिभावकों, ग्राम पंचायतों और समाज से इस पहल को आगे बढ़ाने की अपील भी की गई।

जिला प्रशासन ने अपेक्षा जताई है कि जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक सक्रिय सहभागिता निभाएं, जिससे बेटियों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो सके और जनपद बालिका संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में नई पहचान स्थापित कर सके।

कार्यक्रम में ग्राम प्रधान अंजू कापड़ी, बीटीसी सदस्य भुवन कापड़ी, पूर्व प्रधान सावित्री कापड़ी, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. निर्मल सिंह बसेड़ा, प्रधान सहायक राजकुमार भंडारी, मिशन शक्ति टीम, वन स्टॉप सेंटर की परामर्शदाता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।