टनकपुर। क्षेत्र के ग्राम गैडाखाली नंबर-1 और ऊचौलीगोठ के ग्रामीणों द्वारा जंगली हाथियों तथा अन्य वन्यजीवों से सुरक्षा की मांग को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार उप प्रभागीय वनाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर हाथियों की रोकथाम के लिए पत्थर की सुरक्षा दीवार निर्माण हेतु उपयुक्त स्थलों का चयन करने तथा शीघ्र प्राक्कलन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों द्वारा फसल अथवा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में शासन के निर्धारित मानकों के अनुरूप त्वरित मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और तेज किया गया है।
क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किया गया है, जो चौबीसों घंटे गश्त कर वन्यजीवों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने का कार्य कर रहा है। इसके साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें सुरक्षित व्यवहार अपनाने और वन क्षेत्रों में अनावश्यक प्रवेश से बचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में बनाए रखने के उद्देश्य से जंगलों के भीतर स्थित वाटरहोल और जलकुंडों में टैंकरों के माध्यम से नियमित जलापूर्ति की जा रही है, ताकि भोजन और पानी की तलाश में उनका रुख आबादी की ओर कम हो।
गत वित्तीय वर्ष में विभाग द्वारा लगभग 13 किलोमीटर सोलर फेंसिंग की मरम्मत, नई फेंसिंग की स्थापना तथा सोलर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था कर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया गया है।
इसी क्रम में हल्द्वानी वन प्रभाग द्वारा नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में एआई आधारित स्मार्ट सोलर पावर्ड वाइल्डलाइफ डिटेक्शन कैमरा प्रणाली स्थापित की जा रही है। यह अत्याधुनिक तकनीक हाथियों जैसे बड़े वन्यजीवों की पहचान कर अर्ली वार्निंग सिस्टम के माध्यम से सायरन बजाकर ग्रामीणों को तत्काल सतर्क करती है।
सौर ऊर्जा से संचालित यह प्रणाली दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रभावी साबित हो रही है। इसके माध्यम से वन अधिकारियों को मोबाइल एप और व्हाट्सएप पर तुरंत सूचना मिलती है, जिससे समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में ऊचौलीगोठ और गैडाखाली क्षेत्रों में इसका परीक्षण किया जा रहा है, जिसे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
