पिथौरागढ़। आशुतोष महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में सोमवार से शुरू हुई सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा में रामलीला मैदान भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। कथा व्यास साध्वी मेरुदेवा भारती ने कथा के प्रथम दिवस आत्मदेव प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जिसने भी संसार से सुख की मांग की, वह दुखी ही रहा है। सुख का वास्तविक स्रोत केवल ईश्वर की प्राप्ति में निहित है।

साध्वी मेरुदेवा ने कहा कि आत्मदेव ने अपने जीवनभर ईश्वर से संतान और सांसारिक सुख की मांग की, लेकिन अंत में उन्हें शांति नहीं मिली। ईश्वर-भक्ति से विमुख होकर उन्होंने अपने ही परिवार से दुख पाया। उन्होंने कहा, “संसार का सुख तो मात्र एक बाहरी खोल है, जिसके भीतर दुख छिपा है।”
उन्होंने प्रवचन में तुलसीदास की पंक्तियों का भावार्थ सुनाते हुए कहा कि जब मनुष्य ईश्वर की प्राप्ति कर लेता है, तब दुख के समय भी आनंद का अनुभव करता है। जीवन का सार यही है कि ईश्वर से केवल ईश्वर की ही मांग की जाए, ताकि जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिले और मानव जन्म सार्थक बने।
यह कथा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक 17 नवंबर तक रामलीला मैदान, निकट नगर निगम हॉल, पिथौरागढ़ में आयोजित की जा रही है।
