जौलजीबी से शुरू हुआ व्हाइट वाटर रिवर राफ्टिंग अभियान, चार दिन में तय करेंगे 150 किमी का सफर

पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्रों में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने और जवानों की नदीय संचालन क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल की 55वीं वाहिनी द्वारा जौलजीबी में “व्हाइट वाटर रिवर राफ्टिंग अभियान (तरणी)–2026” का शुभारंभ किया गया। सीमांत मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल, रानीखेत के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान का शुभारंभ जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने हरी झंडी दिखाकर किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सीमांत मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल रानीखेत के महानिरीक्षक अमित कुमार ने की। इस अवसर पर उप महानिरीक्षक क्षेत्रक मुख्यालय अल्मोड़ा सुधांशु नौटियाल, पुलिस अधीक्षक अक्षय कोंडे, सेना, आईटीबीपी, सशस्त्र सीमा बल, स्थानीय प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। अतिथियों ने इस साहसिक अभियान की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

अभियान का नेतृत्व उप महानिरीक्षक सुधांशु नौटियाल अभियान कमांडर के रूप में कर रहे हैं, जबकि 55वीं वाहिनी के कमांडेंट आशीष कुमार उप कमांडर के रूप में संचालन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में पूरी टीम अनुशासन और सुरक्षा के साथ इस अभियान को सफल बनाने में जुटी है।

अभियान में 38 प्रतिभागी छह राफ्ट और दो कायकिंग के माध्यम से भाग ले रहे हैं। प्रत्येक राफ्ट में प्रशिक्षित राफ्टिंग प्रशिक्षक, सुरक्षा दल और सहायक कर्मी शामिल हैं। इसके अलावा एसडीआरएफ और सशस्त्र सीमा बल की त्वरित प्रतिक्रिया टीम को विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है, ताकि अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जा सके।

इस अवसर पर 55वीं वाहिनी द्वारा स्थानीय जनता के लिए मानव चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें आसपास के गांवों के लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शिविर का लाभ उठाया।

राफ्टिंग अभियान महाकाली (काली) नदी के जलमार्ग पर आयोजित किया जा रहा है, जो अपनी तेज जलधाराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यह नदी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ बहती है। प्रतिभागी दल जौलजीबी से सीमा चौकी बूम तक लगभग 150 किलोमीटर की नदी यात्रा चार दिनों में चरणबद्ध तरीके से पूरी करेगा। अभियान के दौरान पहले दिन जुलाघाट, दूसरे दिन पंचेश्वर और अंतिम चरण में 19 मार्च को बूम पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अभियान का उद्देश्य सीमावर्ती नदी क्षेत्रों में संचालन क्षमता को मजबूत करना, तेज जलधाराओं में बचाव कार्य की दक्षता बढ़ाना और संभावित आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को सशक्त बनाना है। इसके लिए प्रतिभागियों को नौ से 14 मार्च तक गोरी नदी में विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान युवाओं में फिटनेस, अनुशासन और साहसिक खेलों के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को भी प्रोत्साहित करेगा।