सीमांत के युवाओं का भविष्य संवारेगी पंचशूल ब्रिगेड, ऐतिहासिक ‘रं पुस्तकालय’ का होगा कायाकल्प

धारचूला (पिथौरागढ़)। भारतीय सेना की पंचशूल ब्रिगेड ने सीमांत क्षेत्र में शिक्षा की लौ जलाने और स्थानीय युवाओं को बेहतर भविष्य देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आज ब्रिगेड के कमांडर गौतम पठानिया ने धारचूला स्थित ऐतिहासिक ‘रं पुस्तकालय’ के नवीनीकरण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया। कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समेटे यह पुस्तकालय आने वाले दिनों में आधुनिक सुविधाओं से लैस होकर छात्रों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान का नया केंद्र बनेगा।
इस अवसर पर कमांडर गौतम पठानिया ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा और ज्ञान का प्रसार करना भारतीय सेना की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रं पुस्तकालय लंबे समय से स्थानीय समुदाय और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का प्रमुख आधार रहा है, लेकिन समय के साथ इसके आधुनिकीकरण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सेना द्वारा किए जा रहे इस जीर्णोद्धार के बाद पुस्तकालय में बेहतर अध्ययन वातावरण के साथ-साथ अधिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न केवल शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन और प्रेरणा भी मिलेगी।
सेना की यह पहल आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करने का एक बड़ा माध्यम है। यह प्रयास भारतीय सेना की ‘राष्ट्र निर्माण में सहभागिता’ की भावना को जीवंत करता है और नागरिक-सेना संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है। कार्यक्रम के दौरान रं संस्था के अध्यक्ष प्रकाश गुंज्याल, राजेंद्र नेगी, महिमन हियांकी, कृष्णा गर्ब्याल, किशोर सिरखाल, आभा फकलियाल, भूपेंद्र थापा मौजूद रहे।