पिथौरागढ़। रामगंगा और सरयू नदियों के संगम पर लंबे समय से चल रहे अवैध खनन के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

रारी खुंटी गांव के सरपंच रोहित सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने माना कि संगम क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों से खनन किया जा रहा है। यह उत्तराखंड लघु खनिज (रियायत) नियमावली 2001 के प्रावधानों का उल्लंघन है और इससे नदी तंत्र व पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि सामान्य परिस्थितियों में खनन कार्य में भारी मशीनों के उपयोग की अनुमति नहीं है। केवल विशेष परिस्थितियों में सीमित शर्तों के साथ ही ऐसी मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद न्यायालय ने जिला अधिकारी पिथौरागढ़ को निर्देश दिए कि सभी खनन पट्टों में तत्काल प्रभाव से भारी मशीनों के उपयोग पर रोक सुनिश्चित की जाए और नियमित रूप से आकस्मिक निरीक्षण कर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
अदालत के इस आदेश के बाद क्षेत्र में अवैध खनन पर लगाम लगने की उम्मीद बढ़ गई है। लंबे समय से स्थानीय ग्रामीण इस मुद्दे को उठा रहे थे, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। अब न्यायालय के हस्तक्षेप से लोगों को राहत मिली है और नदियों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठने की उम्मीद जगी है।
