कारण बताओ नोटिस पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जवाब, कहा- पहले समस्याओं का समाधान करें

टीएचआर आपूर्ति, एफआरएस, लंबित मानदेय और अतिरिक्त ड्यूटी का उठाया मुद्दा, न्यायालय जाने की दी चेतावनी

DTN पिथौरागढ़। बाल विकास परियोजना अधिकारी, पिथौरागढ़ की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभाग को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपते हुए नोटिस में लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पहले वास्तविक परिस्थितियों की जांच की जाए और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।

प्रतिवेदन में कहा गया है कि जुलाई 2026 में कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन (टीएचआर) उपलब्ध ही नहीं कराया गया। ऐसे में वितरण न होने का आरोप लगाने से पहले इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

कार्यकर्ताओं ने बताया कि जून और जुलाई 2026 के दौरान उनसे एसआईआर, बीएलओ, पल्स पोलियो अभियान, सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने से संबंधित कार्यक्रमों तथा विभिन्न शिविरों में लगातार ड्यूटी कराई गई। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित संचालन प्रभावित हुआ। इस संबंध में विभाग को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

एफआरएस (फेस रिकग्निशन सिस्टम) के संबंध में कार्यकर्ताओं ने कहा कि ऐप बेहद धीमी गति से चलता है और अधिकांश क्षेत्रों में नेटवर्क की सुविधा नहीं मिलती। विभागीय अधिकारियों द्वारा भी केंद्रों पर एफआरएस प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। वहीं, एफआरएस होने पर लाभार्थियों के मोबाइल पर टीएचआर लेने का संदेश पहुंच जाता है, जबकि विभाग समय पर टीएचआर उपलब्ध नहीं करा रहा है। इसकी जानकारी भी लगातार विभाग को दी जाती रही, लेकिन इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।

प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि मार्च माह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय लंबित है तथा केंद्रों का किराया भी नहीं दिया गया है। इससे विशेष रूप से विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को आर्थिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं।

कार्यकर्ताओं ने नोटिस में कार्य संतोषजनक न होने पर मानदेय में कटौती किए जाने संबंधी टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पहले लंबित मानदेय का भुगतान किया जाए। यदि विभाग ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया और नोटिस के संबंध में उचित निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए नियमानुसार न्यायालय की शरण लेंगी, जिसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।