DTN हल्द्वानी। कुमाऊं परिक्षेत्र में भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाकर भूमि और वित्तीय निवेश के नाम पर करीब 25 करोड़ रुपये से अधिक की महाठगी करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस सिंडिकेट के खिलाफ वर्ष 2018 से अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से तीन मामलों की विवेचना वर्तमान में अत्यंत गहनता से गतिमान है। इसके अतिरिक्त इस ठगी का शिकार हुए करीब 15 से 20 अन्य पीड़ितों की शिकायतें भी निरंतर परिक्षेत्रीय कार्यालय के संज्ञान में आ रही हैं, जिससे मामले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपराधियों की अवैध संपत्तियों को फ्रीज करने की विधिक कार्रवाई में जुट गई है, ताकि भविष्य में पीड़ितों के नुकसान की भरपाई की जा सके।
प्रकरण की व्यापकता, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए पूर्व में 4 नवंबर 2025 को अपर पुलिस अधीक्षक, हल्द्वानी की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन किया गया था। तत्पश्चात, पूर्व गठित एसआईटी द्वारा अपेक्षित स्तर की विधिक कार्यवाही न किए जाने और जांच में शिथिलता बरतने पर आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया। आईजी ने इस ढिलाई पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उक्त एसआईटी को बीती 17 अप्रैल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया था।
जांच को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, ऊधमसिंहनगर अजय गणपति के सीधे पर्यवेक्षण तथा पुलिस अधीक्षक (अपराध एवं यातायात) ऊधमसिंहनगर जितेन्द्र चौधरी की अध्यक्षता में एक नई पुनर्गठित एसआईटी का गठन किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति एवं एसपी क्राईम जितेन्द्र चौधरी के कुशल निर्देशन व सटीक मार्गदर्शन में पुनर्गठित एसआईटी अपराधियों की धरपकड़ हेतु लगातार धरातल पर सक्रिय थी। इसी क्रम में बीती 21 मई को एसआईटी टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए सिंडिकेट के एक मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया।
एसआईटी की जांच में यह साफ तौर पर प्रमाणित हुआ है कि इन अभियुक्तों द्वारा एक सुव्यवस्थित सिंडिकेट के सदस्य के रूप में अवैध वित्तीय लाभ कमाने के उद्देश्य से इन गंभीर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा था। अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस ने उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत कठोर कानूनी शिकंजा कसा है। इसके साथ ही सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी व उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई प्रचलित की गयी है।
अभियुक्तों द्वारा अपराध की कमाई से अर्जित की गई जिन अवैध संपत्तियों को चिन्हित किया गया है, उन्हें जब्त करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भविष्य में इस विधिक रूप से जब्त संपत्ति को सभी पीड़ितों के मध्य आनुपातिक रूप से वितरित कर उनके नुकसान की भरपाई कराई जा सके। इसके साथ ही चिन्हित की गई इन संपत्तियों के किसी भी प्रकार के अवैध हस्तांतरण या बिक्री पर तुरंत रोक लगाने हेतु जिलाधिकारी, नैनीताल को आवश्यक पत्राचार कर प्रभावी विधिक कदम उठाए गए हैं, ताकि अपराधी अपनी संपत्तियों को ठिकाने न लगा सकें।

