DTN खटीमा। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए खटीमा गोलीकांड के शहीद आंदोलनकारियों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। उन्होंने शहीद आंदोलनकारियों की प्रतिमाओं पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके परिजनों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट और परमजीत सिंह जैसे अमर बलिदानियों के त्याग को उत्तराखंड कभी नहीं भूल सकता। प्रदेश का प्रत्येक नागरिक इन वीर सपूतों के बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।
उन्होंने कहा कि खटीमा गोलीकांड ने पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन को नई दिशा दी। खटीमा की धरती राज्य आंदोलन की तपोभूमि है और इसे आंदोलन की जननी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी घटनाओं में आंदोलनकारियों ने अपने रक्त से उत्तराखंड का इतिहास लिखा। उनके संघर्ष और बलिदान के कारण ही अलग राज्य का सपना साकार हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप उत्तराखंड बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों की मासिक पेंशन 3000 से बढ़ाकर 5500 रुपये की गई है। घायल एवं जेल गए आंदोलनकारियों को 7000 और सक्रिय आंदोलनकारियों को 5500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका को देखते हुए महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। साथ ही सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी व दंगारोधी कानून लागू कर चुकी है। अतिक्रमण अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि मुक्त कराई गई है।
कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक भुवन कापड़ी, विधायक गोपाल सिंह राणा समेत जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
