DTN पिथौरागढ़। नाबालिग भतीजी के कमरे में घुसकर उसके साथ आपत्तिजनक हरकत करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने आरोपित चाचा दीपक कुमार को दोषी करार दिया है। अदालत ने तीनों धाराओं में पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे प्रभावी सजा पांच वर्ष होगी। इसके साथ ही दो धाराओं में कुल 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

अदालत के अनुसार 15 मार्च 2025 को आरोपित अपनी नाबालिग भतीजी के कमरे में पहुंचा था। आरोपित ने उसके साथ आपत्तिजनक तरीके से छेड़छाड़ की और विरोध करने पर उसे तथा उसके स्वजन को जान से मारने की धमकी दी। मामले में 17 मार्च 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पीड़िता समेत अन्य गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर दीपक कुमार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 74, धारा 351(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत दोषी माना।
धारा 74 बीएनएस के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 351(3) के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर संबंधित धाराओं में दो-दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अभियुक्त की पूर्व अभिरक्षा अवधि को सजा में समायोजित करने के भी निर्देश दिए हैं।
पहले भी पॉक्सो मामले में हो चुका है दोषी
न्यायालय के निर्णय में यह भी उल्लेख है कि दीपक कुमार इससे पहले भी एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। विशेष सत्र परीक्षण संख्या 14/2018 में 18 अक्टूबर 2019 को उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई थी।
पीड़िता को 25 हजार रुपये मुआवजा
अदालत ने पीड़िता को 25 हजार रुपये प्रतिकर राशि दिए जाने के निर्देश भी दिए हैं। यह राशि संबंधित नियमों के अनुसार 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है। पहले दी गई अंतरिम प्रतिकर राशि होने पर उसका समायोजन किया जाएगा।
राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) प्रेम सिंह भंडारी ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता पी.एस. धामी ने पक्ष रखा।
