सुशील खत्री, पिथौरागढ़।
सीमांत जनपद पिथौरागढ़ इन दिनों आस्था और उत्साह के अनूठे रंग में रंगा हुआ है। देश के कोने-कोने से आ रहे शिवभक्तों के जयकारों से उच्च हिमालयी क्षेत्र गुंजायमान हैं। गत एक मई को विधिवत रूप से शुरू हुई प्रसिद्ध आदि कैलाश एवं ओम पर्वत यात्रा ने इस बार सफलता के सारे पिछले रिकॉर्ड ध्वस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। यात्रा शुरू हुए अभी मात्र 16 दिन ही बीते हैं, लेकिन इस अल्प अवधि में ही 10 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा आदि कैलाश और अलौकिक ओम पर्वत के दर्शन कर अभिभूत हो चुके हैं। श्रद्धालुओं का यह रिकॉर्ड आंकड़ा पिथौरागढ़ में बढ़ते धार्मिक पर्यटन और सनातन संस्कृति के प्रति गहरी आस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उत्तराखंड सरकार द्वारा सीमांत जनपद पिथौरागढ़ को विश्व स्तरीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए जो निरंतर और प्रभावी प्रयास किए जा रहे थे, उनके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पिछले वर्ष पूरी यात्रा अवधि के दौरान लगभग 40 हजार श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश के दर्शन किए थे, जबकि इस वर्ष शुरुआती दो सप्ताह में ही यह आंकड़ा 10 हजार को पार कर गया है। यात्रियों की इस भारी आमद को देखते हुए इस बार नया कीर्तिमान बनने की पूरी उम्मीद है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए इस बार प्रशासन और सरकार ने यात्रियों की राह आसान की है। सीमांत क्षेत्र के प्रमुख गांवों, जिनमें गुंजी, कुटी और नाभी शामिल हैं, वहां अन्य उच्च हिमालयी पड़ावों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतरीन इंतजाम किए गए हैं। इन क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति में सुधार के साथ-साथ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं और सुदृढ़ संचार नेटवर्क स्थापित किया गया है। यात्रियों के ठहरने के लिए व्यवस्थित और सुगम आवास व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि देश के कोने-कोने से आ रहे यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
आदि कैलाश और ओम पर्वत की यह पावन यात्रा अब केवल धार्मिक आस्था तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों के आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। राज्य सरकार की स्वरोजगार नीति, पर्यटन नीति और होमस्टे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से इस बार सीमांत के गांवों में अभूतपूर्व रौनक देखने को मिल रही है। गुंजी और नाभी जैसे गांवों के होमस्टे इस समय पूरी तरह पैक हैं, जिससे ग्रामीणों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, स्थानीय टैक्सी चालकों और परिवहन व्यवसायियों को लगातार रोजगार मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिकी मजबूत हो रही है। यही नहीं, बाहरी राज्यों से आ रहे यात्रियों द्वारा स्थानीय स्तर पर निर्मित हस्तशिल्प और पहाड़ी उत्पादों की भी जमकर खरीदारी की जा रही है।
यात्रा के इस सफल और सुव्यवस्थित संचालन से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों को अपने ही घर में रोजगार और स्वरोजगार के बेहतरीन नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। बरसों से पलायन का दंश झेलते रहे इन सीमांत क्षेत्रों में अब विकास और आत्मनिर्भरता की एक नई सुबह साफ दिखाई दे रही है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार की बेहतर व्यवस्थाओं के कारण देश भर में इस यात्रा को लेकर बेहद सकारात्मक संदेश गया है। अंतिम छोर पर बसे गांवों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचने से सीमांत का यह क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ चुका है। बुनियादी ढांचे की मजबूती और श्रद्धालुओं के लगातार बढ़ते कदम इस बात का साफ संकेत हैं कि आने वाले दिनों में आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र पर एक नया इतिहास रचने जा रही है।

