बच्चों को वैज्ञानिक सोच और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की जरूरत: डॉ. अशोक पंत

DTN डीडीहाट (पिथौरागढ़)। राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी के दूसरे दिन बाल साहित्य, वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों पर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि बदलते दौर में बच्चों को केवल तकनीक से नहीं बल्कि समाज, संस्कृति और प्रकृति से भी जोड़ने की आवश्यकता है।

अल्मोड़ा से प्रकाशित बाल पत्रिका बालप्रहरी, बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) डीडीहाट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में ‘बाल साहित्य और बच्चे’ विषय पर मुख्य अतिथि डॉ. अशोक कुमार पंत ने कहा कि बच्चों के मन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ना होगा, तभी उनका सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।

राजस्थान के अजमेर स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. चेतना उपाध्याय ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके कारण लोग अपनी संस्कृति और प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों को भारतीय परंपराओं और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया।

डायट अल्मोड़ा के पूर्व प्राचार्य गोपाल सिंह गैड़ा ने कहा कि आज के बच्चे पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं और उनमें सीखने की क्षमता भी अधिक है। आवश्यकता उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की है। वहीं डायट बागेश्वर के प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी ने कहा कि बाल साहित्य लिखते समय बच्चों के परिवेश, अनुभवों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

कहानी वाचन कार्यशाला में दीक्षा जोशी ने अपनी बाल कहानी प्रस्तुत की। कहानी सुनने के बाद बच्चों ने उसकी समीक्षा भी की। सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कहानीकार डॉ. महावीर रवांल्टा ने कहा कि बच्चों के लिए लिखी जाने वाली कहानियां स्थानीय जीवन, संस्कृति और परिवेश से जुड़ी होनी चाहिए। मुख्य अतिथि रजनीकांत शुक्ल ने कहा कि बच्चों को काल्पनिक दुनिया के साथ-साथ वास्तविक जीवन की कहानियों से भी परिचित कराया जाना चाहिए।

कविता वाचन कार्यशाला में साहित्यकारों ने बाल कविताओं का पाठ किया। इसके बाद आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लगभग दो दर्जन कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सम्मेलन की अध्यक्षता मेजर (डॉ.) शक्ति राज कौशिक ने की।

इससे पहले दिन की शुरुआत बाल कवि सम्मेलन से हुई, जिसमें बच्चों ने अपनी स्वरचित कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया। कक्षा पांच की छात्रा शिवाली नेगी ने कार्यक्रम का संचालन किया जबकि कक्षा पांच के छात्र हार्दिक सिंह पापड़ा ने अध्यक्षता की। विभिन्न राज्यों से पहुंचे साहित्यकारों और अतिथियों ने बाल कवियों को सम्मानित किया। बच्चों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

संगोष्ठी के दौरान राजेश भट्ट के नेतृत्व में देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों ने उत्तराखंड की जैव विविधता का अवलोकन भी किया। वहीं पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एल.एम. उप्रेती ने नेत्रदान, देहदान और अंगदान के महत्व की जानकारी देते हुए इससे जुड़े भ्रमों को दूर करने का प्रयास किया।

कार्यक्रम में केपीएस अधिकारी, महेश पुनेठा, पीतांबर अवस्थी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग मौजूद रहे।