पांच वर्षीय मासूम से दुष्कर्म का आरोपित 48 घंटे में गिरफ्तार, पहले भी पोक्सो मामले में जा चुका है जेल

DTN पिथौरागढ़। क्षेत्र से लापता हुई पांच वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने बिना समय गंवाए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बच्ची की गुमशुदगी दर्ज होने के महज आठ घंटे के भीतर उसे सकुशल बरामद कर लिया था। मेडिकल परीक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद केस में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। गिरफ्तार आरोपी पहले भी पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी पाया जा चुका है और हाल ही में जेल से छूटकर बाहर आया था।

पुलिस के अनुसार 23 जून को बच्ची के पिता ने दोपहर करीब एक बजे पुत्री के लापता होने की सूचना कोतवाली पिथौरागढ़ में दी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्काल गुमशुदगी दर्ज कर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक बबीता टम्टा को सौंपी गई, जबकि सहयोग के लिए उपनिरीक्षक प्रियंका मौनी को लगाया गया।

बच्ची की तलाश के लिए पुलिस ने चार अलग-अलग टीमें गठित कीं। नगर क्षेत्र में लगे करीब 20 से 25 सरकारी और निजी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद बच्ची को गुम होने के आठ घंटे के भीतर टनकपुर तिराहे के पास से बरामद कर लिया गया। मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2), 115(2), 137(2), 351(3) तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 5/6 जोड़ दी गई।

पुलिस अधीक्षक के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी के मार्गदर्शन में गठित टीमों ने करीब 50 से 60 सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपित की पहचान होशियार सिंह निवासी रई धनौड़ा, पिथौरागढ़ के रूप में हुई। मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने के बाद पुलिस ने 25 और 26 जून की मध्यरात्रि करीब 12:15 बजे पुनेड़ी महर रोड स्थित एक मोड़ के पास से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपित ने अपराध स्वीकार किया है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित वर्ष 2022 में भी एक नाबालिग बालक के अपहरण और यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार हुआ था। उस प्रकरण में न्यायालय ने उसे कारावास की सजा सुनाई थी। वह 14 मई 2026 को निजी बंधपत्र पर जेल से रिहा होकर बाहर आया था।

पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपित के विरुद्ध ऐसी धाराएं जोड़ी गई हैं, जिनमें आजीवन कारावास अथवा मृत्युदंड तक का प्रावधान है। पुलिस ने कहा कि न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर आरोपित को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

घटना का सफल खुलासा करने में कोतवाली पुलिस की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्ची की सकुशल बरामदगी में हेड कांस्टेबल मुकेश शर्मा और कांस्टेबल पंकज गिरी की अहम भूमिका रही, जबकि आरोपित की गिरफ्तारी और पूरे अभियान का नेतृत्व उपनिरीक्षक कमलेश चंद्र जोशी ने किया। उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम को पांच हजार रुपये के नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।