लिपूलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार शुरू, भारतीय व्यापारियों का पहला दल तकलाकोट पहुंचा

DTN पिथौरागढ़ (धारचूला)। लंबे इंतजार के बाद आज  धारचूला स्थित ऐतिहासिक लिपूलेख दर्रे से वर्ष 2026 के भारत-चीन सीमा व्यापार का शुभारंभ हो गया। पहले चरण में भारतीय व्यापारियों का पहला दल सफलतापूर्वक चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित तकलाकोट मंडी पहुंचा, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद व्यापारिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं। सीमा व्यापार शुरू होने से सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में उत्साह का माहौल है।

उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि शुक्रवार शाम भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारी और चार हेल्परों सहित 20 सदस्यीय दल ने गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में आव्रजन संबंधी सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद दल ने नाबीढांग में रात्रि विश्राम किया।

आज सुबह करीब 10:15 बजे लिपूलेख दर्रे पर चीन के अधिकारियों ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराईं, जिसके बाद भारतीय व्यापारियों को तिब्बत में प्रवेश की अनुमति दी गई। इसके बाद दल तकलाकोट मंडी पहुंचा और वहां व्यापारिक गतिविधियों का शुभारंभ किया।

उपजिलाधिकारी ने बताया कि चीन प्रशासन ने पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश की अनुमति दी है, जो पूर्व में सीमा व्यापार कर चुके हैं और पहले से पंजीकृत हैं। यही वजह रही कि भारतीय व्यापारी इस बार अपने साथ कोई नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गए। वे तकलाकोट में पहले से उपलब्ध अपने माल और आवश्यक औपचारिकताओं के आधार पर व्यापार का संचालन करेंगे।

उन्होंने बताया कि अगले व्यापारिक दलों को भेजने के लिए चीनी प्रशासन के साथ ई-मेल के माध्यम से लगातार संपर्क बनाया गया है। अनुमति और तिथियां मिलते ही अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट भेजा जाएगा।

सीमा व्यापार शुरू होने से सीमांत क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इससे वर्षों पुरानी सीमा व्यापार परंपरा को मजबूती मिलेगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार व कारोबार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।