DTN बेरीनाग (पिथौरागढ़)। जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर सेल और बेरीनाग पुलिस ने म्यूल अकाउंट संचालित करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि इन बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की करोड़ों रुपये की संदिग्ध धनराशि का लेन-देन किया जा रहा था। मामले में एक अन्य आरोपित की तलाश जारी है।

एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर मिली शिकायतों के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक नीरज भाकुनी के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। जांच के दौरान दो ऐसे बैंक खाते चिह्नित हुए, जिनका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को इधर-उधर स्थानांतरित करने और उसके स्रोत को छिपाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार एक खाते में 12.35 लाख रुपये तथा दूसरे खाते में 1.04 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध धनराशि जमा हुई थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि दोनों खाते म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
मामले में कोतवाली बेरीनाग में धारा 318(4), 61(2) बीएनएस एवं 66डी आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पवन कुमार (22) निवासी ग्राम पौंसा, बेरीनाग, प्रियांशु कुमार (22) निवासी जाड़ापानी, कूलाखेत, पिथौरागढ़ तथा अमनदीप निवासी गणाई गंगोली का नाम सामने आया।
पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए प्रियांशु कुमार को हल्द्वानी के दमुवाढूंगा स्थित अंबेडकर पार्क के पास से तथा पवन कुमार को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपितों को न्यायालय में पेश किया गया है। पुलिस फरार आरोपित की तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में कोतवाली बेरीनाग के प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार गंगवार, हेड कांस्टेबल संजीव यादव और कांस्टेबल नरेंद्र मेहता शामिल रहे।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से हासिल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए करते हैं। ऐसे खातों का उपयोग साइबर अपराधों में धन शोधन की कड़ी के रूप में किया जाता है।
