धारचूला। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर ऐक्टू से संबद्ध यूनियनों ने आज धारचूला में जोरदार जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। मजदूरों ने न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपये किए जाने, ठेका प्रथा समाप्त करने और नए लेबर कोड को वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के बाद उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान एनएचपीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन और भोजनमाता संगठन के मजदूर तवाघाट तिराहे पर एकत्र हुए, जहां सभा आयोजित की गई।
सभा में वक्ताओं ने मजदूर दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आठ घंटे काम के अधिकार के लिए वर्ष 1986 में कई मजदूरों ने कुर्बानी दी थी। आरोप लगाया कि वर्तमान में केंद्र सरकार कार्य अवधि को 12 घंटे तक बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रही है, वह भी बिना ओवरटाइम के।
वक्ताओं ने कहा कि देशभर में मजदूर संगठन 42 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। साथ ही आंदोलनकारी मजदूरों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया।
इस मौके पर आशा कार्यकत्रियों, भोजनमाताओं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, समान कार्य के लिए समान वेतन, ठेका प्रथा समाप्त कर संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने तथा स्कीम वर्कर्स को ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई।
जुलूस और प्रदर्शन में एनएचपीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उदय सिंह धामी, उपाध्यक्ष पदम थलाल, महामंत्री नरेंद्र भंडारी, ऐक्टू के प्रदेश उपसचिव विनोद कुमार, भोजनमाता यूनियन की अध्यक्ष माया थापा सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
