आदि कैलाश के खुले कपाट, ‘ॐ पर्वत’ के दर्शन के साथ वर्ष 2026 की यात्रा का भव्य शंखनाद

पिथौरागढ़/धारचूला। देवभूमि के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र आदि कैलाश धाम के कपाट आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के बीच भगवान शिव के मंदिर के द्वार खोलते ही संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया। कपाट खुलने के साथ ही वर्ष 2026 की प्रतिष्ठित आदि कैलाश और ॐ पर्वत दर्शन यात्रा का भी विधिवत शुभारंभ हो गया है, जिसे लेकर शिव भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
आज सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया था। मुख्य पुजारी द्वारा विशेष अनुष्ठान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ मंदिर के गर्भगृह के ताले खोले गए। इस पावन घड़ी का साक्षी बनने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ जिला प्रशासन के आला अधिकारी, पुलिस प्रशासन, आईटीबीपी के जवान और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के पावन विग्रह के दर्शन कर न केवल व्यक्तिगत शांति, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
प्रशासन ने इस वर्ष की यात्रा को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के दुर्गम भूगोल को देखते हुए यात्रा मार्ग की मरम्मत, बेहतर आवास व्यवस्था, सुदृढ़ संचार प्रणाली और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिलाधिकारी ने यात्रियों से अपील की है कि वे उच्च हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह यात्रा उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था के लिए भी जीवन रेखा मानी जाती है। आदि कैलाश यात्रा का प्रारंभ होना स्थानीय होमस्टे संचालकों, गाइडों और छोटे व्यापारियों के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिससे पिथौरागढ़ में पर्यटन को एक नई ऊंचाई मिलेगी और स्थानीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार वैश्विक स्तर पर होगा। फिलहाल, पहले जत्थे की रवानगी के साथ ही समूचा उच्च हिमालयी क्षेत्र आध्यात्मिक आभा से चमक उठा है।