DTN धारचूला। सीमांत धारचूला में रातभर हुई भारी बारिश ने एक बार फिर कहर बरपाया है। धारचूला-तवाघाट मार्ग पर कुलागाड़ का पुल तेज बहाव की चपेट में आकर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। पुल इस कदर बहा कि मौके पर उसका नामोनिशान तक नहीं बचा। पुल टूटने के साथ ही सीमांत क्षेत्र की आवाजाही की महत्वपूर्ण कड़ी भी टूट गई है।
कुलागाड़ पुल धारचूला को उच्च हिमालयी क्षेत्रों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इसी सड़क से आदि कैलाश-मानसरोवर, गुंजी, व्यास, दारमा और चौंदास घाटियों के साथ ही कई सीमांत गांव जुड़े हैं। ऐसे में पुल के ध्वस्त होने से इन क्षेत्रों में आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है। पूर्व में भी कुलागाड़ में पुल क्षतिग्रस्त होने से तीनों घाटियों का संपर्क प्रभावित हो चुका है।
भारी बारिश के बाद कुलागाड़ में पानी का बहाव बेहद तेज हो गया। उफनते पानी के साथ मलबा और बोल्डर आने से पुल के आसपास सड़क का बड़ा हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। मौके की तस्वीरों में सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर जमा दिखाई दे रहे हैं। पुल के आसपास झीलनुमा पानी एकत्रित होने की आशंका ने खतरा और बढ़ा दिया है।
पुल के ध्वस्त होने से धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। लोगों से भारी वाहन, यात्री वाहन अथवा अन्य किसी वाहन से इस मार्ग की ओर नहीं जाने की अपील की गई है। प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल पर अनावश्यक रूप से नहीं पहुंचने तथा काली नदी के आसपास जाने से बचने को कहा है।
लगातार बारिश और नदी के तेज बहाव को देखते हुए क्षेत्र में खतरा बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों, वाहन चालकों और सीमांत क्षेत्र की ओर जाने वाले यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। मार्ग खुलने और स्थिति सामान्य होने तक लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा गया है।

