देहरादून। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज आईआरटीडी प्रेक्षागार में आयोजित बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 149 मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन प्रदान कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और नवरात्रि के प्रथम दिन का एक साथ होना विशेष संयोग है। भारतीय संस्कृति में कन्याओं को शक्ति का स्वरूप माना गया है, लेकिन कन्या पूजन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब बेटियों को सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। बेटियां परिवार की खुशियों के साथ समाज की शक्ति और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों को जन्म से लेकर शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार तक हर स्तर पर सहयोग दे रही है। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। नंदा गौरा योजना के तहत बेटी के जन्म पर 11 हजार और 12वीं उत्तीर्ण करने पर 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक चार लाख से अधिक बेटियां इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों को आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न होना पड़े, इसके लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के साथ कक्षा एक से 12वीं तक सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। निशुल्क साइकिल योजना, महिला छात्रावास और उच्च शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से भी बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में डिजिटल शिक्षा का महत्व बढ़ा है। मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन देने का उद्देश्य उन्हें तकनीक से जोड़कर ज्ञान और कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध कराना है। कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए भी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से धनराशि देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों को शिक्षा के साथ कौशल विकास, नवाचार और स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। ड्रोन दीदी योजना, आलम्बन आर्ट, आलम्बन गांव, आलम्बन कैफे और नव्या-2.0 जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं और किशोरियों को कौशल तथा आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बाल विवाह और अन्य सामाजिक बुराइयों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। अनाथ बच्चों के लिए सरकारी सेवाओं में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा पॉक्सो पीड़ित बच्चों को कानूनी सहायता और मानसिक देखभाल उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले में सहायता व्यक्ति की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की मेहनत और प्रतिभा के साथ अन्याय न हो, इसके लिए राज्य में कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। उन्होंने बालिकाओं से बड़े सपने देखने, निरंतर मेहनत करने और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि राज्य सरकार बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम के माध्यम से मेधावी बालिकाओं को सम्मानित करने से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और अन्य बेटियां भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगी।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अपर सचिव कर्मेंद्र सिंह, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
