‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम में त्योहारों की खुशियों के साथ स्वच्छता, सुरक्षा और पढ़ाई का दिया संदेश

DTN देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के करीब आठ लाख स्कूली बच्चों से वर्चुअल संवाद किया। शासकीय आवास से जुड़े इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बच्चों को धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज की शुभकामनाएं देते हुए त्योहारों के सांस्कृतिक महत्व, स्वच्छता, सुरक्षा और पढ़ाई को लेकर प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से आत्मीय बातचीत करते हुए उनके परिवार का हालचाल जाना और दीपावली की तैयारियों के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल खुशियां मनाने का अवसर नहीं हैं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने के साथ हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम भी हैं। इन पर्वों से आपसी प्रेम, सहयोग और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने की सीख मिलती है।
उन्होंने बच्चों से दीपावली पर घर की साफ-सफाई में परिवार का सहयोग करने और स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की। कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने में प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। छोटी-छोटी कोशिशें मिलकर प्रदेश और देश को स्वच्छ बना सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने मिट्टी के दीये जलाने और स्थानीय कुम्हारों व कारीगरों के उत्पाद खरीदने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को अपनाकर स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे कारीगरों की आजीविका को बढ़ावा मिलेगा और उनके परिवारों की खुशियों में भी भागीदारी होगी। त्योहारों के दौरान बच्चों को पटाखों से दूर रहने तथा दीये और फुलझड़ियां जलाते समय बड़ों की देखरेख में रहने की सलाह भी दी।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में भी भाग लेना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की ललक जरूरी है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के माध्यम से और उपयोगी बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इससे पहले ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों ने निबंध के माध्यम से उत्तराखंड के विकास को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए थे। बच्चों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि उपयोगी सुझावों पर भविष्य की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में भी विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को ‘विकल्प रहित संकल्प’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि इसका मतलब अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने विद्यार्थियों से खूब पढ़ने, खेलने और नई चीजें सीखने के साथ अपनी प्रतिभा से माता-पिता, प्रदेश और देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सचिव शिक्षा ज्योति यादव, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे और संयुक्त निदेशक गोविन्द राम जायसवाल मौजूद रहे।
