गंगोलीहाट में गैर इरादतन हत्या के मामले में टैक्सी चालक समेत दो को सात-सात वर्ष का कठोर कारावास

DTN पिथौरागढ़। जनपद के बहुचर्चित गैर इरादतन हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में न्यायालय सत्र न्यायाधीश, पिथौरागढ़ धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने आज अपना अहम फैसला सुनाया। अदालत ने दोनों अभियुक्तों सुरेंद्र सिंह उर्फ सूर्या और पंकज सिंह भंडारी को दोषी करार देते हुए धारा 304 के तहत सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा साक्ष्य छिपाने के आरोप में धारा 201 के तहत दोनों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया गया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा, जबकि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) महेंद्र आर्या ने पैरवी की। मामले के अनुसार 27 नवंबर 2019 को वादी रोहित सिंह ने अपने बड़े भाई महेंद्र सिंह मेहरा को बुद्ध पार्क तिकोनिया (हल्द्वानी) से गंगोलीहाट के जरमाल गांव में दोस्त की शादी में जाने के लिए परिचित चालक सुरेंद्र सिंह उर्फ सूर्या की टैक्सी (यूके 04टीए 1516) में बैठाया था। उसी रात करीब आठ बजे महेंद्र ने अपनी मां को फोन कर सकुशल गंगोलीहाट पहुंचने की सूचना दी थी। हालांकि अगले दिन 28 नवंबर 2019 को महेंद्र सिंह का शव जरमाल गांव से लगभग पांच किलोमीटर पहले भूलीगांव के पास मोटर मार्ग के किनारे पड़ा मिला।

थाना गंगोलीहाट में दर्ज प्राथमिकी के बाद विवेचना के दौरान पुलिस ने जब चालक सुरेंद्र सिंह और पंकज सिंह भंडारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो घटना का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने जरमाल गांव जाने से पूर्व महेंद्र के साथ शराब पी और किसी बात पर हुए विवाद के बाद उसके साथ गंभीर मारपीट की, जिससे महेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद अपराध को छिपाने के इरादे से शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया और अभियुक्त स्वयं शादी समारोह में शामिल होने चले गए। पुलिस ने चालक की मैक्स गाड़ी से मृतक महेंद्र के कपड़े, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज भी बरामद किए थे।

अदालत में अभियोजन ने कुल 13 गवाह पेश कर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी कड़ी को मजबूती से स्थापित किया। दोनों पक्षों की दलीलें और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद सत्र न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को गैर इरादतन हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए यह दंडादेश पारित किया।