छह साल पुराने मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष दोषी, दो साल की कठोर कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना

DTN पिथौरागढ़। मुनस्यारी के तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान को विशेष सत्र न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) पिथौरागढ़ ने मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग के मामले में दोषी करार दिया है। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 504 तथा एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में दोषसिद्धि करते हुए अलग-अलग सजा सुनाई है। मामले में न्यायालय ने आज फैसला सुनाया।

2019 में दर्ज हुआ था मुकदमा

अभियोजन के अनुसार, 14 अक्टूबर 2019 को पंचायत चुनाव के दौरान मुनस्यारी में कैफे संचालक विक्रम सिंह जगंपांगी के कैफे में तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान पहुंचे थे। कैफे में भीड़ होने के कारण पर्याप्त कुर्सियां उपलब्ध नहीं थीं। आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद हुआ और बाद में रात में कैफे बंद करते समय थानाध्यक्ष ने विक्रम सिंह के साथ मारपीट की तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।

आरोप है कि इसके बाद विक्रम सिंह थाने पहुंचा तो वहां भी उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई। मामले में 24 नवंबर 2019 को मुनस्यारी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने प्रदीप सिंह चौहान के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।

16 गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों पर हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 16 गवाहों के बयान कराए। इनमें शिकायतकर्ता, प्रत्यक्षदर्शी, पुलिसकर्मी और चिकित्सक शामिल रहे। अभियोजन ने मेडिकल रिपोर्ट, सीटी स्कैन, एक्स-रे, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो सहित विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।

न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष के गवाहों ने घटना से संबंधित बयान दिए। न्यायालय के फैसले में कहा गया है कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं।

चार धाराओं में दोषसिद्धि

न्यायालय ने धारा 323 के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास, धारा 504 के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1) के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने तथा धारा 3(2) के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है।

छह साल पांच माह 17 दिन बाद आया फैसला

मामले में आरोप पत्र चार मार्च 2020 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय के अभिलेख के अनुसार मुकदमे की अवधि छह वर्ष पांच माह 17 दिन रही और आज (21 अगस्त 2026) फैसला सुनाया गया।