देवीधुरा में गूंजे मां वाराही के जयकारे, आठ मिनट चली ऐतिहासिक बग्वाल

DTN चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा में आज रक्षाबंधन के अवसर पर ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। चार खाम और सात थोक के बग्वालियों के बीच खेली गई अनूठी पाषाण युद्ध परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मां वाराही के जयकारों और शंखनाद के बीच पूरा बग्वाल मैदान भक्तिमय हो उठा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक रेखा यादव समेत जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान छोलिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति भी दी गई। मुख्यमंत्री ने मां वाराही देवी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बग्वाल उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, आस्था और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक है। सरकार विकास के साथ सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत देवीधुरा में विभिन्न विकास और सौंदर्यीकरण कार्य कराए जा रहे हैं। देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कहते हुए उन्होंने 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की घोषणा की।

प्रधान पुजारी की पूजा-अर्चना के बाद चार खामों—वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया—के बग्वालियों ने मैदान में प्रवेश किया। पारंपरिक वेशभूषा और ढालों से सजे बग्वालियों के बीच दोपहर 1:48 बजे बग्वाल शुरू हुई, जो 1:55 बजे समाप्त हो गई। आठ मिनट तक चली बग्वाल में फल और फूलों का प्रयोग किया गया। मुख्यमंत्री ने भी बग्वाल का अवलोकन किया।

महिलाओं और बच्चियों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बग्वाल की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां युद्ध के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे से गले मिलते हैं।