भाजपा प्रत्याशी को हराकर निर्दलीय नारायण लाल बने पाटी नगर पंचायत अध्यक्ष

DTN पाटी (चम्पावत)। नगर पंचायत पाटी के अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी नारायण लाल ने भाजपा प्रत्याशी को पराजित कर जीत हासिल की है। आज  संपन्न हुई मतगणना के बाद घोषित परिणामों में नारायण लाल को सर्वाधिक मत प्राप्त हुए, जिसके बाद उन्हें निर्वाचित घोषित कर दिया गया। परिणाम सामने आते ही उनके समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई और जीत का जश्न मनाया गया।

मतगणना अभिलेख के अनुसार चुनाव मैदान में तीन प्रत्याशी थे। भाजपा प्रत्याशी नवीन राम को कुल 514 मत प्राप्त हुए, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी नारायण लाल के पक्ष में 678 मत पड़े। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी पार्वती देवी को 301 मत मिले। इस प्रकार नारायण लाल चिरोला ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी नवीन राम को 164 मतों के अंतर से पराजित किया।

चुनाव परिणाम के अनुसार नगर पंचायत पाटी में कुल 1611 मत डाले गए। इनमें 1493 मत वैध पाए गए, जबकि 103 मत निरस्त घोषित किए गए। इसके अलावा 15 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को पसंद न करते हुए नोटा का विकल्प चुना।

मतगणना पूर्ण होने के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने नारायण लाल को विजयी घोषित किया। जीत की घोषणा होते ही समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। नगर पंचायत क्षेत्र में पूरे दिन चुनाव परिणामों को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा।

विजयी प्रत्याशी नारायण लाल ने मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास किया जाएगा। उन्होंने नगर पंचायत क्षेत्र के विकास, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार तथा जनसमस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही।

पवनदीप राजन का ‘सुरों का जादू’ राजनीति में भी चला
​इस चुनाव की सबसे बड़ी यूएसपी रहे इंडियन आइडल विनर और मशहूर सिंगर पवनदीप राजन। दरअसल, नवनिर्वाचित अध्यक्ष नारायण लाल रिश्ते में पवनदीप राजन के जीजा लगते हैं। अपने जीजा को चुनाव जिताने के लिए पवनदीप ने पाटी की गलियों और वार्डों में घूम-घूमकर जमकर पसीना बहाया था।
​पवनदीप के रोड शो और जनसंपर्क के दौरान युवाओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी। जानकारों का मानना है कि पवनदीप राजन की लोकप्रियता और उनकी जमीनी अपील ने नारायण लाल के पक्ष में माहौल बनाने में ‘गेम चेंजर’ का काम किया।

नगर पंचायत पाटी के इस चुनाव परिणाम को स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि निर्दलीय प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार को सीधे मुकाबले में हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया है। इससे क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों में भी नई चर्चा शुरू हो गई है।