DTN पिथौरागढ़। दहेज हत्या के करीब आठ साल पुराने मामले में न्यायालय ने मृतका के पति को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में पिथौरागढ़ पुलिस की विवेचना और अभियोजन पक्ष की पैरवी के बाद यह फैसला आया है।

मामला पांच फरवरी 2018 का है। थल थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपनी पुत्री को प्रताड़ित कर उसकी हत्या किए जाने के आरोप में उसके पति हरीश रावत के खिलाफ तहरीर दी थी। इसके आधार पर पुलिस ने हरीश रावत के खिलाफ दहेज मृत्यु और प्रताड़ना से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
मामले की विवेचना तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक शेखर चन्द्र सुयाल ने की। उन्होंने साक्ष्य जुटाने के बाद 30 मार्च 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी सहायक निदेशक अभियोजन राकेश चन्द के पर्यवेक्षण में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेन्द्र आर्या ने की।
सुनवाई पूरी होने के बाद सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने अभियुक्त हरीश सिंह रावत, निवासी लोहाकोट, देवलथल को दोषसिद्ध करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने पर उसे चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
